सस्ती देशभक्ति राष्ट्रीय गरिमा के लिए खतरा : हामिद अंसारी

0
हामिद अंसारी

बंगलूरु | उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आज कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सहिष्णुता राष्ट्र का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने नेशनल ला स्कूल आफ इंडिया विश्वविद्यालय के 25 वें कान्विकेशन को संबोधित करते हुए कहा कि एक ऐसे समाज में जहां विभिन्न धर्मों और राजनीतिक सिद्धांतों पकड़ लोग रहते हैं, उनमें आपसी मतभेद को दूर करने का एकमात्र फॉर्मूला सहिष्णुता है।

उन्होंने कहा कि हालांकि केवल सहिष्णुता ही अनेकता में एकता और सामूहिक समाज का आधार नहीं हो सकती, इसके साथ एक दूसरे को समझने और स्वीकार करने का माद्दा होना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद का यह कथन दोहराया कि हमें न केवल अन्य धर्मों के साथ सहिष्णुता का प्रदर्शन करना होगा बल्कि उनकी ताकत को स्वीकार भी करना होगा क्योंकि सत्य ही सभी धर्मों का आधार है।

पढ़ें – बाबरी मस्जिद फैसले के लिए 3 सदस्यीय बेंच का गठन

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों को नए सिरे से स्थिर बनाना है जिनमें धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता शामिल है। यह चुनौती हमें इस बात पर जोर देता है कि समीकरण महत्वपूर्ण हैं। धार्मिक स्वतंत्रता सामूहिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय समाज में सहिष्णुता और एक दूसरे को स्वीकार करने की क्षमता का भी उल्लेख किया।

पढ़ें – मोदी अपने देश के भविष्य से खेलते हुए उसे युद्ध में ढकेल रहे हैं : चीन

हामिद अंसारी ने कहा कि राष्ट्रीयता दरअसल हमारा सांस्कृतिक बंधन है। अगर रूढ़िवादिता और संकीर्ण से परिपूर्ण राष्ट्रीयता को स्वीकार जाए तो असहिष्णुता और कट्टरपंथी देशभक्ति को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में इस असंगत सिद्धांत ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है और यह राजनीतिक और सांस्कृतिक समाज में शामिल कर गया है। इसका एक असर यह भी है कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी को चाहे वह निर्दोष ही क्यों न हो, समाप्त कर देने की कोशिश की जा रही है। इस तरह राष्ट्रीय गरिमा खतरा हो गया है।

पढ़ें – मुस्लिम नाम देखा और लेबनानी पर्यटक को बना डाला आतंकवादी

उन्होंने कहा कि अत्यधिक राष्ट्रीयता और अपना ध्यान असंवेदनशील कर लेना यह ऐसी चीजें है जिनसे दुनिया में एक स्थान पर असुरक्षा बढ़ती है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए बाहरी और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिक जिम्मेदारी है। हामिद अंसारी ने कहा कि लोकतंत्र को सिर्फ इस संस्थाओं द्वारा नहीं बल्कि सही मायने में उसकी उपस्थिति द्वारा परीक्षण किया जाता है। यह देखा जाता है कि जनता के विभिन्न वर्गों से उठने वाली अलग-अलग आवाजों को कैसे सुना जा रहा है। सभी ध्वनि को स्वीकार किया जा रहा है या नहीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here