गूगल मना रहा है इस मुस्लिम महिला की कामयाबी का जश्न

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मुहम्मद फैज़ान

गूगल ने आज अपने डूडल में एक मुस्लिम महिला कमला दास सुरैया को जगह दी है जिनकी तस्वीर आप अभी भी गूगल के होमपेज पर देख सकते हैं लेकिन यह बात बाबांगे-दुहल कही जा सकती है कि हम में
से शायद ही कोई हो जो सुरैया के बारे में जानता हो या इससे पहले किसी ने उनका नाम भी सुना हो।
31 मार्च 1934 को केरल के त्रिचूर जिले में पैदा हुई इस बहुमुखी प्रतिभा की धनी महिला ने 8 साल की उम्र में ही लिखना प्रारंभ कर दिया था यहां तक कि 15 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते कमला दास जिसे हम आज सुरैय्या के नाम से जानते हैं एक मशहूर कवित्री के रूप में पहचानी जाने लगी थी।
शुरुआती दौर में कमला दास ने मलयालम जुबान में ही अपनी रचनाएं लिखी लेकिन समय के साथ वह अंग्रेजी में भी अपनी रचनाओं का अनुवाद करने लगी परन्तु उन्हें सबसे अधिक प्रसिद्धि तब मिली जब उन्होंने अपनी आत्मकथा माय स्टोरी को प्रकाशित किया यह किताब इतनी विवादस्पद रही और इतना पढ़ी गई कि इसका 15 भाषाओं में अनुवाद करना पड़ा।
कमला दास अपने समाज मे महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न और भेदभाव से काफी आहत थी और यही वजह है कि उन्होंने इस पर मुखर होकर लिखा जिसके लिए उन्हें कई बार गंभीर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, उन्होंने इस भेदभाव की वजह जानने के लिए विश्व भर के विभिन्न बड़े धर्मों का काफी गहराई से अध्ययन किया और आखिर में इस्लाम कबूल कर लिया। उन्होंने अपने अंतिम दिनों में लिखा कि उन्हें इस्लाम से बेहतर समानता और महिलाओं को अधिकार देने वाला धर्म अभी तक नजर नहीं आया और यही वजह है कि उन्होंने अपना धर्म तर्क कर इस्लाम कबूल कर लिया है।
धर्म परिवर्तन करने के बाद कमला दास ने अपना नाम कमला दास सुरैया रखा और उन्होंने अपनी आगे की रचनाएं इसी नाम से लिखी जिनमें उनकी 2001 में प्रकाशित हुई है या अल्लाह नाम की किताब काफी मशहूर हुई।

 

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