पाखंड यानि मुनाफिक़त की निशानियाँ

आदिल सुहैल जफर

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पाखंड

पाखंड का अर्थ है अपनी कथनी और करनी से वह कुछ ज़ाहिर करना जो दिल में मौजूद विश्वासों और महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ हो और इस्लाम में पाखंड का अर्थ, दिल में नास्तिकता, शिर्क तथा  गुनाहों के इकरार और कर्म के साथ अपने आप को व्यावहारिक रूप में ईमान वाला, और अल्लाह पर यकीन लाने वाला ज़ाहिर करना।

खुदा ने जहन्नुम के सबसे निचला हिस्से को कपटी, यानी, पाखंड करने वालों का ठिकाना मुकर्र कर रखा हैजिसका जिक्र सुरह निसा की आयत नम्बर 145 में भी मिलता है कि बेशक कपट और धोखा करने वाले ये मुनाफिक नरक के सबसे निचले स्तरों में होंगे (सूरत निसा (4) / कविता 145)

चाहे यह मुनाफिक ,निफाक-इ-अकबर(बड़े पाखंडों) पर अमल करने वाले हो या निफाक-ए-असगर (छोटे पाखंडों) पर , अविश्वासी पाखंड वाले हों या व्यावहारिक पाखंड वाले, सबका ठिकाना वही है।

पाखंड यानि मुनाफिकत के कुछ विशेषताएं ऐसी भी हैं जिन्हें अक्सर लोग बस मनोवैज्ञानिक, या व्यक्तिगत आदतों के रूप में देखते और समझते हैं, जबकि अल्लाह यहाँ वह सब पाखंड और मुनाफिकत वाले ही काम हैं, और उनके कार्यों को करने वाले, उनके गुणों को रखने वाले लोग मुनाफिक है | 

अल्लाह तआला ने हमारे लिए उसकी करूणा और दया प्राप्त के माध्यमों मेंएक जरिया ये भी अता फरमाया कि उसने अपने रसूले करीम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जुबाने-मुबारक से हमें अपने यहाँ मुनाफिकत अथवा पाखंड करार पाए जाने वाले कार्यों कीखबर अता फरमा दी , अपने यहाँ पाखंडी करार पाए जाने वालों की विशेषताओं की पहचान अता फ़रमा दी। तो आइए आज हम पाखंड और मुनाफ़िकत कीउन्ही निशानियों के बारे मेंअपनी बात आगे बढ़ाते है |

पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया जिसमें ये चार (सिफातें , गुण, लक्षण) मौजूद हों वह शुद्ध तौर पर मुनाफिक है, और जिसमें इनमें से एक लक्ष्ण मौजूद हों तो उसमें निफाक यानि पाखंड के गुण मौजूद हैं |

(1) जब उसके पास अमानत रखवाई जाए तो वह उसमें विश्वासघात करे 
(2) जब बात करे तो झूठ बोले 
(3) जब वादा करे तो वादा खिलाफी करे 
(4) जब झगड़ा करे तो फट पड़े (यानी अभद्रता पर उतर आए) 

और साथ ही ये भी इरशाद फरमाया –  जिसमें तीन (सिफ़तें, गुण, लक्षण) मौजूद हो तो वो मुनाफिक और पाखंडी है भले ही वह नमाज पढ़ता हो, और रोजे रखता हो, हज और उमरा (भी) करता हो और ये भी  कहता हो कि मैं मुसलमान हूं, ये वो व्यक्ति है जो

(1) बात करे तो झूठ बोले 
(2) वादा करे तो वादा खिलाफी कर 
(3) जब यह अमानत दारबनाया तो विश्वासघात करे 

(सहीह अलजामे अ़लसगीर / हदीस 3043)

सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम के कथनों से भी हमें मुनाफ़िक्त और पाखंडियों से सम्बन्धित कुछ मालूमातें फराहम होती है :
खलीफा-ए सानी (second caliph) अमीरुल मोमिनीन उमर इब्न अलख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हुमा का कहना है कि मैंने  अपनी उंगलियों की तादाद से ज्यादा मर्तबा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये फरमाते हुए सुना कि “मैं इस उम्मत पर साहिबे-इल्म (ज्ञानीपाखंडियों) से बहुत डरता हूँ |
पूछा गया मुनाफिक अथवा पाखंडी साहिबे-इल्म (ज्ञानी) कैसे होता है ?
तो अमीरुल मोमिनीन उमर इब्न अलख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने इरशाद फरमाया आलिमुल-लिसान,  ज़ाहिलुल क़ल्बी वल-अम्ली  , यानि जुबान का तो आलिम हो लेकिन दिल और दिल और अमल से जाहिल |

(अल अहादिसुल मुख्तारा/हदीस236/रावी उमर इब्न अल खत्ताब (रजी०)/ अबू उस्मान अब्दुर रहमान बिन मिल अलनहदी अन उमर रजी अल्लाहु अन्हु)

साहिबे-किताब इमाम मुहम्मद बिन अब्दुल वाहिद अलमुक़द्दसी का कहना है कि इसे मुख्तलिफ असनाद से रिवायत किया गया है जिसमें मर्फ़ूअ भी है और मौकूफ भी और ज्यादा दुरुस्त ये है कि ये मौकूफ़ है यानि उमर रजी० का फरमान है, |
हुजैफा इब्नुल यमान (रजी०) से पूछा गया कि “पाखंडी यानि मुनाफिक कौन है?”
कहा “अल्लज़ी यसिफुल इस्लामा वला याअमलू बिही “यानी वह जो इस्लाम का दावेदार हो लेकिन उस पर अमल न करता हो “

अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से कहा गया कि “हम शासकों और प्रमुखों के पास जाते हैं तो कुछ और बात (यानी उनकी प्रशंसा ही) करते हैं और जब वहाँ से निकलते हैं तो इस बात के खिलाफ बात करते हैं” तो इब्न उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा ने कहा कुन्ना नउद्दुहा निफाकन यानि हम  इसे पाखंड और मुनाफिक में गिना करते थे (सही अलबखारी / किताब अलअहकाम / अध्याय 27)

विभिन्न शब्दों में ये आशय कई किताबों में सही पहचान के साथ वर्णित है, जैसे सुनन इब्ने माजा / हदीस 3975 / किताब अल-फित्न/ अध्याय 12, अहमद / हदीस 5829, वगैरा

उपरोक्त हदीसों और अकवाले सहाबा में मुनाफिकों और पाखंडियों के निम्न ख़ुसूसियात बताई गयी हैं |

  • विश्वासघात
  • झूठ
  • अहद–ए-शिकनी , वादा खिलाफी
  • गद्दारी
  • गुस्से की हालत में बेकाबू होकर बुराई और बदकलामी पर आ जाना
  • लालच
  • अभद्रता
  • बेहूदा बात, अश्लील वार्ता
  • बहुत अच्छी और आध्यात्मिक बातें करना, लेकिन उनकी वास्तविकता से अनजान रहना
इन उपरोक्त बयान की गयी निशानियों की रौशनी में हम सब ज़रा अपने बारे में सोचें तो हम में कौन सी निशानियाँ पाई जाती हैं? और हमारे आसपास किस किस में क्या निशानी पाई जाती है? और अगर हमारे अंदर इनमें से कोई निशानियाँ है तो इससे निजात पाने की कोशिशे करें, और अपने मुसलमान भाई बहनों में अगर इनमें से कोई निशानी पायें to उसे भी हिकमत-ओ-नरमी के साथआगाह करते हुए इस्लाह की रगबत दिलाएं | अल्लाह रब्बुल इज्जत से दुआ है कि वो हम सबको पाखंड और मुनाफिक्त और ऐसे लोगों से महफूज़ रखे |

 

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