मोदी सरकार ने स्वीकार गलती, कहा जीएसटी पर नही हुई पूरी तैयारी

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जीएसटी

मुखबिर न्यूज | देश के सबसे बड़े कर सुधार आन्दोलन के रूप में जीएसटी को प्रचारित करने के बाद मोदी सरकार अब बैकफुट पर आती दिख रही है |हाल ही में मोदी सरकार ने संकेत दिया है कि उसकी जीएसटी प्रणाली में कुछ खामियां है जिन्हें दूर करने की जरूरत है | लेकिन तब तक कारोबारियों को इसका भार झेलना होगा |

ख़ास बातें

1 सरकार ने माना कि जीएसटी प्रणाली में हैं कुछ खामियां
2 कारोबारियों का खोता जा रहा है विश्वास 
3 पूरे देश में हो रहा है विरोध 
4 मोदी सरकार कर सकती है संशोधन

ज्ञात रहे कि 1 जुलाई से देश भर में एकल टैकल प्रणाली यानि जीएसटी को लागु कर दिया गया है लेकिन उपभोगता और कारोबारी मोदी सरकार के जरिये ऐतिहासिक बताये जा रही इस टैक्स प्रणाली को समझने में नाकाम दिखाई दे रहे है | देश भर के कारोबारी समूहों में भारी रोष व्याप्त है | हर कारोबार से ताल्लुक रखने वाले उधोग प्रतिनिधि लगातार सरकार के पास अपनी शिकायतें ले कर आ रहे है लेकिन सरकार फिर भी उनका हल तलाशने में नाकाम नजर आ रही है |

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जीएसटी के लागु होने के बाद कारोबारी वर्ग अपने बिजनेस को लेकर काफी आशंकित है | हालत तो ये है कि मोदी सरकार इस सिस्टम के प्रति न तो कारोबारियों और उपभोक्ताओं के मन में विश्वास पैदा कर पा रही है और न ही उसके नियम और कायदों की पूर्ण रूप से व्याख्या कर पा रही है | छोटे कारोबारियों के बीच इसे लेकर काफी आशंका और डर का माहौल है। शायद यही वजह है कि मोदी सरकार को इन समस्याओं को देखते हुए बैकफुट पर आना | प्राप्त सूचना के अनुसार सरकार के जरिये छह महीनों तक कारोबारियों पर सख्ती नही की जाएगी |

केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड यानी सीबीईसी की अध्यक्ष वनजा सरना ने बुधवार को कहा कि जीएसटी की शुरुआत से तीन से छह महीने तक करदाताओं पर सख्ती नहीं होगी।  वनजा सरना सीआईआई के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने आईं दिल्ली आई हुई थी |

याद रहे देश के सबसे बड़े टैक्स सुधार का श्रेय लेने के चक्कर में 1 जुलाई से जल्दबाजी में ही जीएसटी प्रणाली लागु कर दी थी | इस टैक्स प्रणाली में बहुत सी खामिया थी जिन्हें लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे है और सरकार पर इसे वापस लेने या संशोधन करने का दबाव डाला जा रहा है |

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