मोदी जी स्टेज पर है जनता दर्शक है माइक से मन की बातें सुनाई जा रही है

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मोदी

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 वें स्वतंत्रता दिवस से पहले भारत छोडो आंदोलन के जज्ब-ओ-जुनून को उजागर करते हुए देश की जनता से आग्रह किया कि वे भारत से सांप्रदायिकता, जातिवाद, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गरीबी समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हों । वर्ष 2022 तक एक नया भारत बनाने जिसमें सांप्रदायिकता, जातिवाद के लिए कोई जगह न हो । उन्होंने जनता से कहा कि वह एक ” नया भारत ” बनाने में मदद करें हालाँकि उन्होंने ये नही बताया कि वो खुद अपने संगठन और आरएसएस की विचारधारा को खत्म करने के लिया क्या रणनीति अपनाएंगे क्यूंकि प्रधानमंत्री ये बात उस जनता से कह रहे थे जिसके अधिकांश लोग आरएसएस और विहिप जैसे संगठनो के जरिये गौ रक्षा या धर्मिकता के नाम पर सताए जा रहे है |

अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ” मन की बात ” मोदी ने / 9 अगस्त 1942 ई के भारत छोडो आंदोलन का हवाला दिया जिसमें महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था और उसके बाद उत्पन्न होने वाले परिवर्तन के परिणाम में ही अंग्रेज भारत से छोड़ने पर मजबूर हो गए और / 15 अगस्त 1947 को हमारा देश पूरी तरह से स्वतंत्र हो गया । इस तरह 1942 और 1947 के बीच केवल पांच साल देश के लिए निर्णायक साबित हुए। इसी तरह अगले पांच साल 2017 से 2022 के बीच एक और 5 साल की अवधि में देश से सभी समस्याओं को खत्म करने के लिए संघर्ष किया जाएगा। सारे देश की समस्याओं को समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने इन समस्याओं की पहचान करते हुए कहा कि सांप्रदायिकता, जातिवाद, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गरीबी में मूल समस्या है और जनता को उसका अंत करने के लिए पूरे जोश और भक्ति के साथ सहयोग करने की जरूरत है।

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मोदी ने कहा कि जिस तरह भारत छोडो आंदोलन की भावना पैदा करके अंग्रेजों को देश से चले जाने के लिए मजबूर कर दिया गया था। इसी तरह सांप्रदायिकता, जाति उन्मूलन के लिए संगठित प्रयास किया जाये | हमें आजादी मिले 70 साल हो चुके हैं। सरकारें तो आती और जाती रहती हैं। हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात की भी वजाहत नही की कि आखिर सम्प्रदायिकता के खात्में के लिए उनकी नेतृत्व प्रणाली क्या कर रही है क्यूंकि उनकी सरकार के गठन के बाद देश में हिंसक घटनाये अपने चरम पर पहुँच गयी है | इखलाक से लेकर पहलू ख़ाक के कत्ल पर मोदी हुकुमत की तरफ से कोई सख्त संदेश नही दिया गया अगर ऐसा होता और हिंसक भीड़ों पर करवाई की जाती तो आज प्रधान सेवक को अपने मन की बात कहने के लिए रेडियो के सहारे की जरूरत न पडती |

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हालाँकि मोदी ने उम्मीद की है कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस इस जुनून के साथ मनाया जाए कि हम अगले 5 साल में अपने सभी समस्याओं को समाप्त कर देंगे उन्होंने कहा कि अगर 125 करोड़ जनता / 9 अगस्त 1942 को याद करके / 15 अगस्त को प्रतिज्ञा कि वह एक नागरिक के तौर पर व्यक्तिगत रूप से देश की सेवा करेंगे। एक परिवार के व्यक्ति के रूप में एक शहर से संबंधित व्यक्ति या एक गांव से संबंध रखने वाले निवासी के रूप में काम करें तो लक्ष्य में सफलता मिलना सुनिश्चित है।

याद रहे कि मोदी सरकार ऐसे ही हजारों सब्जबाग दिखा कर सत्ता में आई थी | देश को हर साल 1 करोड़ नौकरियां और मुल्क की ग्रोथ रेटिंग 10 तक पहुंचाने का ख्वाब या फिर देश से सम्प्रदायिकता को खत्म करने की बात सब कुछ ही यही था लेकिन आज 3 साल गुजर चुके है , मोदी जी स्टेज पर है जनता दर्शक है माइक से मन की बातें सुनाई जा रही है प्रधानमंत्री जनता को मन की बात सुनाने के बजाए जनता के मन की बात सुनने की कोशिस करते |

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