बाबरी मस्जिद फैसले पर रिव्यु में नहीं जाएगा वक़्फ़ बोर्ड

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बाबरी मस्जिद

लखनऊ: बाबरी मस्जिद फैसले पर अपनी असहमति जताने वाले आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की योजना बनाई थी लेकिन अब लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित बोर्ड के कार्यालय में हुई मीटिंग के बाद सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने रिव्यु में ना जाने का फैसला किया है यानी एक तरह से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने रंजन गोगोई द्वारा दिए गए फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है

रिव्यु दाखिल न करने के फैसले पर बैठक में मौजूद सात में से छह सदस्यों ने इस पर सहमति दी है। सिर्फ एक सदस्य अब्दुल रज्जाक ने इस निर्णय का विरोध किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई 5 एकड़ की जमीन लेने के मुद्दे पर अगली बैठक में विचार होगा। देखना यह है कि वक्त बोर्ड के फैसले पर मुस्लिम समाज के प्रतिक्रिया देता है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के इस फैसले का विरोध करने वाले अब्दुल रज्जाक के मुताबिक यह अजीब बात है कि बोर्ड के अधिकतर सदस्यों ने रिव्यू पिटिशन दाखिल न करने का फैसला किया है जो मुझे समझ में नहीं आता मैं अकेला व्यक्ति था जिसने इसके खिलाफ आवाज उठाई हालांकि जमीन लेनी है या नहीं लेनी इसका फैसला अगली बैठक में होगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नाराज

याद रहे कि बाबरी मस्जिद मामले पर रिव्यू में ना जाने का फैसला सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का है जबकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड एक अलग संस्था है और वह रिव्यु में जाने के फैसले का समर्थन कर रही है जिसको लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बीच दरार पैदा हो गई है।

गौरतलब हो कि इसको लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ मे मीटिंग की थी जिसमें इस फैसले को अदालत पर फिर से ले जाने की बात कही गई थी लेकिन अब सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इसमें टांग अड़ा दी है और वह इस फैसले को रिव्यु में ले जाने के पक्ष में नहीं है। अब देखना यह है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी का इस मामले पर क्या रिएक्शन होता है?

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