देश तनाशाही का शिकार है

मौलाना सय्यद मिन्न्तुल्लाह रहमानी

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साम्प्रदायिकता

मौलाना सय्यद मिन्न्तुल्लाह रहमानी

इस्लाम सामूहिकतावाद की शिक्षा देता है ये अलहदगी और व्याक्तित्वाद का धर्म नहीं है। उसने हमें बताया कि कलमा पढ़ने वाले आपस में भाई-भाई हैं। एक कलमा-गो चाहे वो दुनिया के किसी कोने में भी बसे, दूसरे कलमा गो से उसका करीबी और गहरा ताल्लुक है और इस संबंध का तकाजा यह है कि हम एक दूसरे की खुशी और खुशी के क्षणों, पीड़ा और परेशानी के समय में शरीक हों । उनके दुख दर्द को जानें और उसे बांटने की कोशिश करें, साथ ही इस्लाम की शिक्षा यह भी है कि हर मुसलमान पर उसके पड़ोसी का अधिकार है और इसी पर बस नहीं…

हर मुसलमान पर देश वालों का अधिकार है, यहाँ तक कि पूरी मानवता का अधिकार है और एक कलमा पढने वाले की हैसियत उसे सारे अधिकारों को पूरा करना है, अगर आपके पड़ोसी पर कोई मुसीबत आ पड़ी है, अगर मोहल्ला वाले या शहर वाले किसी समस्या से ग्रस्त हो गए हैं, अगर देश एक महत्वपूर्ण समस्या में उलझ गया है या पूरी मानवता गलत रुख अख्तियार कर रही है तो आपको चाहिए कि अपनी बिसात के अनुसार, सुधार की कोशिश करें। कठिनाइयों को रास्ते से हटाने, मुसीबतों को दूर करने में मदद करें, और सबों के लिए बेहतर और अनुकूल वातावरण प्रदान करें।

हम और आप मुसलमान हैं, यह मुसलमानों मानवता का सार है, यह बेहतरीन उम्मत है इसका काम यह है कि इंसान को भलाई और नेकी की दावत दे, बुरे कामों से रोके यदि आपका देश गलत रास्ते पर चल रहा है तो इस्लामी बिंदुओं को देखो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप देश सुधार की कोशिश करें, सही पथ और भलाई का निमंत्रण दें, आज हमारा देश विभिन्न महत्वपूर्ण और अजीबोगरीब मुद्दों में घर गया है, इन मुद्दों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सांप्रदायिकता है इस अभिशाप ने देश के करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रखा कई शिक्षित लोग भी इस संकट में गिरफ्तार हैं और इसकी वजह देश की कार्यशैली पर असर पड़ रहा है, देश तरक्की के बजाय तेजी से पतन की ओर जा रहा है।

आप गौर करें अगर किसी देश की बहुत बड़ी पार्टी, बहुत बड़ा समुदाय या बहुत बड़ी जाति, अपनी जान व माल इज़्ज़त व आबरू हर समय जोखिम से घिरा हुआ महसूस कर रही हो, उसे अपना और अपनी क़ौम का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा हो और उसे विश्वास हो जाए कि किसी भी समय उसका अस्तित्व अत्याचार के हत्थे चढ़ सकता है तो वो राष्ट्र, वो सांप्रदाय या सम्प्रदाय के व्यक्ति देश के लिए क्या सेवा कर सकते हैं? और उसका दिल किसी काम में लग सकता है? इसी तरह देश की बहुत बड़ी संख्या हमेशा अगर इस चिंता में रहे कि आज यहां शांति भंग करना है और कल वहाँ। वे लोग इसी प्रकार फ़ितनों, दसीसकारियों और साजिशों में संलग्न रहते हैं तो क्या ऐसे लोग देश की भलाई के लिए कुछ कर सकते हैं? आप विश्वास करें हत्यारा और मृत, ज़ालिम व मज़लूम दोनों में से कोई भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते पूरी व्यवस्था बिगड़ जाएगी और देश तेजी से विनाश के गड्ढे में गिर जायेगा।

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हमारे देश का हाल ऐसा ही है। इस देश के बहुत व्यापक क्षेत्र में घृणा और पूर्वाग्रह बुराईयों, अत्याचार मारधाड़ का बाजार गर्म है, एक समुदाय की विशाल बहुमत तानाशाही बनी हुई है और दूसरा सांप्रदाय मज़लूम है परिणाम यह है कि घरेलू कार्यों की गति धीमी पड़ चुकी है | सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि सरकार इसे रोकने, शांति स्थापित करने और शहरी जीवन के आराम बनाए रखने में पूरी तरह विफल हो चुकी है। हमारे प्रतिनिधि जिनका काम सरकार चलाना है, वह केवल कुर्सियों पर बैठे हैं और बेफिक्र दिखते हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल तीन है, जनता की जान व माल और सम्मान की रक्षा, सरकार इन तीन महत्वपूर्ण उद्देश्यों में बार-बार नाकाम हो चुकी है और होती जा रही हमें अब बिल्कुल उम्मीद नहीं कि उसके द्वारा सार्वजनिक जीवन का छिना हुआ आराम लौट सकेगा है |

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हम मुसलमान हैं, हमारी दोहरी जिम्मेदारी है, हम बेहतरीन उम्मत के लोग हैं हमारे पास जीवन का संदेश है , ऐसा निजाम है जिसके जरिये हम जीवन के हर कोने में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं और दूसरों को भी मार्गदर्शन दे सकते हैं, इसलिए हमें इस दृष्टिकोण से भी इन स्थितियों का जायजा लेना चाहिए और रोग का इलाज खोजने के लिए कोशिशें करनी चाहिए ।

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हम विचार करें कि अपनी जिम्मेदारियों को कैसे अंजाम दे सकते हैं और वर्तमान स्थिति में हमारा व्यवहार क्या होनाचाहिए। घरेलू समाज नष्ट हो रहा है इस लिए आवश्यक है कि हम इसे ठीक करें , बुराई को अच्छाई से बदलें, इस देश में हम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, देश के इतिहास को नया मोड़ दे सकते हैं, बशर्ते हम खुद इसके लिए तैयार हों , यह बात ध्यान में रहे कि देश की एक बहुत बड़ी संख्या का स्वभाव विध्वंसक बन चुका है उसे तोड़ फोड़से विशेष रुचि हो गयी है हमें सुधार करनी है तो इसके लिए एहतियात की भी जरूरत है | हमें इस देश को अशांति करने वालों के हाथों से बचाना है इसलिये काफी कोशिशें जरूरी होंगी और कोशिशों के साथ खुदा पर भी यकीन करना होगा |

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