बाबरी मस्जिद को लेकर नरेंद्र मोदी ने दिया बड़ा बयान

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात के 59 वें संस्करण में बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा बयान दिया है। बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस फैसले के बाद, अब देश, नई उम्मीदों, आकांक्षाओं के साथ नए रास्ते पर, नए इरादे लेकर चल पड़ा है।

हालांकि उनके इस बयान के बाद ट्वीटर और फेसबुक पर लोग तरह तरह की टिप्पड़ियां भी कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जब न्यायपालिका क ही खरीद लिया गया तो क्या फैसला और कैसा न्याय? कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दबाव में दिया गया फैसला बताया।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरी कामना है कि न्यू इंडिया, इसी भावना को अपनाकर शांति, एकता और सद्भावना के साथ आगे बढ़े। देश हित में शांति, एकता और सदभावना के मूल्य सर्वोपरि हैं। मोदी ने कहा कि जिस तरह देश वासियों ने फैसले को स्वीकार किया और संयम का परिचय दिया है वह अभिभूत करने वाला है हालांकि नरेंद्र मोदी ये बताना भूल गए कि अगर फ़ैसला मुसलमानों के पक्ष में होता है तो उनके समर्थकों की प्रक्रिया क्या होती है।

पहली बार है जब नरेंद्र मोदी ने खुले तौर पर बाबरी मस्जिद पर अपनी राय रखी है लेकिन सवाल तो यही है कि क्या इस मामले में इंसाफ हुआ है। गौरतलब हो कि बाबरी मस्जिद मामले पर रंजन गोगोई के द्वारा किए गए फैसले पर पूर्व चीफ जस्टिस गांगुली भी असहमति जता चुके हैं। जस्टिस गांगुली का कहना है कि अगर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया होता तो सुप्रीम कोर्ट आज क्या फैसला देती।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बाबरी मस्जिद फैसले पर लोगों ने संयम का परिचय दिया हालांकि उन्हें कहना तो ये चाहिए था कि इस मामले में मुसलमानों ने परिपक्वता और संयम का सुबूत दिया और शांत रहे। वैसे भी देखा जाए तो मुसलमान ही इस देश में लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ है वरना देश और न्यायपालिका भी अब सवालों के कटघरे में आ चुकी है।

याद रहे बाबरी मस्जिद पर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड रिव्यु में जाने का फैसला कर चुकी है। बोर्ड के इस फैसले से मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इससे पहले मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद बनाने के लिए दी जाने वाली 5 एकड़ जमीन को भी लेने से मना कर दिया था।

कानून पर नजर रखने वालों ने जिस तरह से बाबरी मस्जिद मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है उससे न्यायपालिका पर सवाल उठना लाजमी हो गया है। अब देखना यह है कि रिव्यु में जाने के बाद इस मामले पर क्या फैसला होता है।

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